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(1). मशीनी कूट भाषा (Machine Code Language)
(2). एसेम्बली कूट भाषा (Assembly Code Language)
(3). उच्च स्तरीय भाषाएँ (High Level Language)
(1). मशीनी कूट भाषा (Machine Code Language) :- इस भाषा में प्रत्येक आदेेश के दो भाग होते हैं —(क) आदेश कोड (Operation Code) तथा (ख) स्थिति कोड (Location Code) इन दोनों को 0 और 1 के क्रम में समूहों कर व्यक्त किया जाता है ! कम्प्यूटर के आरंभिक दिनों में प्रोग्रामरों द्वारा कम्प्यूटर को आदेश देने के लिए 0 तथा 1 के विभिन्न क्रमों का ही प्रयोग किया जाता था ! यह भाषा समय ग्राही थी , जिसके कारण एसेम्बली एवं उच्च स्तरीय भाषाओं का प्रयोग किया जाने लगा !
(2). एसेम्बली कूट भाषा (Assembly Code Language) :- इस भाषा में याद रखें जाने लायक कोड का प्रयोग किया गया , जिसे नेमोनिक कोड कहा गया ! जैसे:- ADDITION के लिए ADD , SUBSTRACTION के लिए SUB एवं JUMP के लिए JMP लिखा गया ! परन्तु इस भाषा का प्रयोग एक निश्चित संरचना वाले कम्प्यूटर तक ही सीमित था , अत: इन भाषाओं को निम्न स्तरीय भाषा कहा गया !
(3). उच्च स्तरीय भाषाएँ (High Level Language) :- उच्च स्तरीय भाषाओं के विकास का श्रेय IBM कम्पनी को जाता है ! फाॅरट्रान (FORTRAN) नामक पहली उच्च स्तरीय भाषा का विकास इसी कम्पनी के प्रयास से हुआ ! इसके बाद सैकड़ों उच्च स्तरीय भाषाओं का विकास हुआ ! ये भाषाएँ मनुष्य के बोलचाल और लिखने में प्रयुक्त होने वाली भाषाओं के काफी करीब है ! कुछ स्तरीय भाषाएँ निम्न हैं—
(a). फाॅरट्रान(FORTRAN) :- कम्प्यूटर की इस भाषा का विकास IBM के सौजन्य से जे० डब्ल्यू. बेकस ने 1957 ई० में किया था ! इस भाषा का विकास गणितीय सूत्रों को आसानी से और कम समय में हल करने के लिए किया गया था !
(b). कोबोल(COBOL) :- कोबोल वास्तव में काॅमन ब्यूजिनेस ओरिएंटेड लैंग्वेज का संक्षिप्त रूप है ! इस भाषा का विकास व्यावसायिक हितों के लिए किया गया ! इस भाषा की संक्रिया के लिए लिखे गये वाक्यों के समूह को पैराग्राफ कहते हैं ! सभी पैराग्राफ मिलकर एक सेक्शन बनाते हैं और सेक्शनों से मिलकर डिविजन बनता है !
(c). बेसिक (BASIC) :- यह अंग्रेजी के शब्दों बिगनर्स ऑल पर्पस सिम्बाॅलिक इंस्ट्रक्शन कोड का संक्षिप्त रूपान्तर है ! इस भाषा में निहित आदेश के किसी निश्चित भाग को पारित किया जा सकता है , जबकि इससे पहले की भाषाओं में पूरे प्रोग्राम को कम्प्यूटर में डालना होता था और प्रोग्राम के ठीक होने पर आगे के कार्य निष्पादित होते थे !
(d). अल्गोल (ALGOL) :- यह अंग्रेजी के अल्गोरिथमिक लैंग्वेज का संक्षिप्त रूप है ! इसका निर्माण जटिल बीजगणितीय गणनाओं में प्रयोग हेतु बनाया गया है !
(e). पास्कल (PASCAL) :- यह अल्गोल का परिवर्द्धित रुप है ! इसमें सभी चरों को परिभाषित किया गया है , जिसके कारण यह अल्गोल एवं बेसिक से भिन्न है !
(f). कोमाल (COMAL) :- यह Common Algorithumic Language का संक्षिप्त रूप है ! इस भाषा का प्रयोग माध्यमिक स्तर के छात्रों के लिए किया जाता है !
(g). लोगो (LOGO) :- इस भाषा का प्रयोग छोटी उम्र के बच्चों को ग्राफिक रेखानुकृतियों की शिक्षा देने के लिए किया जाता है !
(h). प्रोलाॅग (PROLOG) :-यह अंग्रेजी शब्द प्रोग्रामिंग इन लाॅजिक का संक्षिप्त रूप है ! इस भाषा का विकास 1973 ई० में फ्रांस में किया गया था ! इसका विकास कृत्रिम बुद्धि के कार्यों के लिए किया गया है , जो तार्किक प्रोग्रामिंग में सक्षम है !
(i). फोर्थ (FORTH) :- इस भाषा का अविष्कार चार्ल्स मूरे ने किया था ! इसका उपयोग कम्प्यूटर के सभी प्रकार के कार्यों में होता है ! इन सभी उच्च स्तरीय भाषाओं में एक समानता है कि लगभग सभी में अंग्रेजी के वर्णों (A, B, C, D... आदि) एवं इण्डो-अरेबियन अंको (0, 1,2,3,..आदि) का प्रयोग किया जाता है !
नोट:- PILOT, C, C±±, LISP, UNIX, एवं SNOBOL कुछ अन्य उच्च स्तरीय भाषा है !

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